ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाना पुलिस ने फर्जी GST अधिकारी बनकर 29 लाख रुपये हड़पने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। अभियुक्तों ने 20 जुलाई को एक व्यक्ति की कार रोककर खुद को GST अधिकारी बताया और कंपनियों के सत्यापन के नाम पर उसे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद उससे 29 लाख रुपये नकद वसूले।
गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान कशिश चौहान उर्फ ईशू, राजेश पंवार, विवेक शर्मा, अंकित शाही और अंशुल के रूप में हुई है। पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से 24.50 लाख रुपये नकद और 4.50 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए हैं।
इसके अलावा मोबाइल फोन, पुलिस सब-इंस्पेक्टर की वर्दी, दिल्ली सिविल डिफेंस की वर्दी और वारदात में इस्तेमाल दो कारें भी बरामद की गई हैं। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार अभियुक्तों में कोई भी पुलिसकर्मी नहीं है। मामले में आगे की जांच और अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस के द्वारा पूछताछ में मुख्य अभियुक्त कशिश चौहान द्वारा बताया गया कि मुझे वर्ष 2021 में ज्ञात हुआ था कि पीड़ित जीएसटी के बिलों में हेराफेरी करके मोटा मुनाफा कमाते हैं। हम लोगों ने उसे ब्लेकमेल कर पैसा हडपने की योजना बनाई। प्लान के मुताबिक हम लोगों ने लगातर पीड़ित की हर गतिविधि पर नज़र रखी । दिनांक 20 जुलाई को अभियुक्तों द्वारा पीड़ित की कार ग्रान्ड विटारा को एस एस्पायर सोसायटी के पास रोक कर अभियुक्तों का एक अन्य साथी अपने को जीएसटी अधिकारी बता कर उसकी गाड़ी में बैठ गया। हम सब भी वहां से चल दिये। इस दौरान कशिश उर्फ ईशू चौहान जिसने उप निरिक्षक की वर्दी पहनी हुई थी गाडी चला रहा था। पीड़ित को पिछली वाली सीट पर चांद के साथ बैठाया गया। राजेश कुमार आगे वाली सीट पर था। प्लान के मुताबिक अभियुक्तों द्वारा पीड़ित को पैसे वसूलने के लिए ब्लैकमेल किया और जीएसटी के मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी, जिस पर पीड़ित घबरा गया और पैसे देने को तैयार हो गया। पीड़ित को उसकी ही गाडी में इधर उधर घुमाते रहे, जब पीड़ित का भाई 29 लाख रुपये कैश लेकर आया तब पीड़ित को उसकी गाडी सहित छोड दिया और अपनी गाडी बुलाकर वहां से निकल गए गये।
डीसीपी सेन्ट्रल नोएडा शैलेन्द्र कुमार सिंह के अनुसार घटना में शामिल कोई भी अभियुक्त पुलिस कर्मी नहीं है। जॉच के दौरान ज्ञात हुआ है कि घटना में शामिल अभियुक्तों में मुख्य अभियुक्त कशिश उर्फ इशू चौहान यशोभूमि द्वारका दिल्ली में डीसीपीओ (ड्राइवर कम पम्प ऑपरेटर) के पद पर कार्यरत है, अभियुक्त राजेश पंवार दिल्ली नागरिक सुरक्षा बल (डीसीडी) से जुडा हुआ है, विवेक शर्मा एस्कोर्ट मजेसर बल्लभगढ में डीसीपीओ (ड्राइवर कम पम्प ऑपरेटर) के पद पर कार्यरत रहा है, अंकित ग्राम सलारपुर में लोहे की ग्रिल/गेट बनाने का काम करता है एवं घटना में प्रयुक्त वाहन एक्सएल-6 का स्वामी है, जो मूलरूप से देवरिया का रहने वाला है, अंशुल दिल्ली में प्रोपर्टी का काम करता है, जो मूलरूप से जनपद एटा का रहने वाला है। अभियुक्तगण के अपराधिक इतिहास के सम्बन्ध में छानबीन की जा रही है।
