दादरी, ग्रेटर नोएडा 2009 में रिठौरी गांव में पुलिसकर्मियों पर हमले और सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में अमित कसाना नंदू उर्फ़ रावण प्रमोद और पप्पी के खिलाफ दादरी थाने में मामला दर्ज़ हुआ था। 2009 से चल रहे मामले में आज महत्वपूर्ण फैसला आया है।
नंदू उर्फ़ रावण की मृत्यु के बाद प्रमोद और पप्पी हो गए थे बरी।
इस प्रकरण में अमित कसाना नंदू उर्फ़ रावण प्रमोद और पप्पी के खिलाफ दादरी थाने में मामला दर्ज़ हुआ था।
जिसमें नंदू उर्फ़ रावण की मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद अमित कसाना, प्रमोद और पप्पी के खिलाफ केस चला था। मामले की सुनवाई के दौरान सबूतों के आभाव के चलते प्रमोद और पप्पी न्यायलय द्वारा बारी कर दिए गए थे।
अमित कसाना पर सुनवाई चलती रही। कोर्ट द्वारा अमित कसाना को विभिन्न धाराओं में दोषी करार देते हुए अलग-अलग सजाएं सुनाई गई हैं।
यह फैसला 14 अक्टूबर 2026 को सुनाया गया। मामला सत्र परीक्षण संख्या 878/2009 और मुकदमा अपराध संख्या 498/2009 से संबंधित है।
अपर सत्र न्यायाधीश सौरभ द्विवेदी के आदेश के अनुसार, अभियुक्त अमित कसाना को भारतीय दंड संहिता की धारा 147 के तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास और एक हजार रुपये का जुर्माना, धारा 148 के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास और दो हजार रुपये का जुर्माना तथा धारा 307 सहपठित धारा 149 के तहत सात वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा, धारा 332 और 353 धारा 149 के तहत भी 3-3 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
अभियुक्त की और से सज़ा में नरमी बरतने की अपील की गई थी।
अदालत ने आदेश में कहा कि अभियुक्त की ओर से सजा में नरमी बरतने की मांग की गई थी। बचाव पक्ष ने बताया कि अभियुक्त वर्ष 2009 से मुकदमे का सामना कर रहा है और वह अपने परिवार का कमाने वाला सदस्य है। वहीं, अभियोजन पक्ष की तरफ से शासकीय अधिवक्ता रोहताश शर्मा ने अभियुक्त को गंभीर अपराधों का दोषी बताते हुए कठोर सजा देने की मांग की।
अपराध की प्रकृति पर विचार करने के बाद सुनाई गई सजा।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों, मामले के तथ्यों और अपराध की प्रकृति पर विचार करने के बाद सजा सुनाई। आदेश के अनुसार, पहले से जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में अभियुक्त को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
