नोएडा एक बार फिर डिज़िटल अरेस्ट करके पैसे ऐठने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार पीड़ित महिला के लैंडलाइन पर अज्ञात द्वारा कॉल कर बताया गया कि, उनके आधार कार्ड का उपयोग करते हुए बैंक खाते खोले गये जिनका प्रयोग जुआ व अवैध हथियार की खरीद करने में किया गया है। अभियुक्त द्वारा पीड़ित को गिरफ्तारी का भय दिखाकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर 3,29,70,000 रूपये की धोखाधड़ी की गयी थी, जिसके संबंध में पीड़ित द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर दिनांक 30 जून 2025 को थाना साइबर क्राइम पर मुकदमा दर्ज़ किया गया था।
विगत 16 जुलाई को थाना साइबर क्राइम पुलिस द्वारा कार्यवाही करते हुए वादिया को डिजिटल अरेस्ट कर 3 करोड़ 29 लाख 70 हज़ार रूपये की धोखाधड़ी करने वाले साइबर अपराधी विपुल नागर (बेनिफेशयरी खाताधारक) को जयपुर, राजस्थान से गिरफ्तार किया गया है। उक्त प्रकरण से संबंधित 3 अभियुक्तों को पूर्व में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
जानकारी के अनुसार विपुल नागर(बेनिफेशयरी खाताधारक) ने पूछताछ में बताया कि उसने अपने बैंक खाते को अपने दोस्त अजीत को दे दिया था, जिस पर धोखाधडी से सम्बन्धित धनराशि प्राप्त की जाती थी। जिसका कमीशन अभियुक्त को प्राप्त होता था। उपरोक्त घटना से सम्बन्धित 63 लाख रुपये अभि0 विपुल नागर के खाते में ट्रांसफर हुए थे।
नोट- साइबर जागरूकता एवं साइबर अपराध से बचने के उपाय
1- साइबर से संबंधित किसी समस्या के लिये साइबर क्राइम हेल्पलाइन नम्बर- 1930 अथवा साइबर क्राइम की वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करें।
2- डिजिटल अरेस्ट- यदि आपके पास कोई व्यक्ति स्वयं को सीबीआई अधिकारी, पुलिस अधिकारी, ED का अधिकारी, नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी अथवा इनकम टैक्स का अधिकारी बनकर कॉल करता है, उसके बाद आपको स्काइप/ zoom/ ऐप डाउनलोड करा कर वीडियो कॉल करने के लिए कहता है और आपका आईडी अवैध मादक पदार्थ के विक्रय में हवाला जैसे कारोबार/ money laaundering/ smuggling/ fake import-export में संलिप्त पाए जाने की बात कह कर डराता है, आपके विरुद्ध हुई FIR दिखाता है, सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिखाता है या कोर्ट सुनवाई करवाता है। तो यह व्यक्ति साइबर अपराधी है आपको डरना या भयभीत नहीं होना है इसकी तुरंत शिकायत अपने निकटवर्ती पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन में करनी है। साइबर अपराधी के कहने पर किसी भी खाते में कोई भी धनराशि ट्रांसफर नहीं करनी है। यदि आप ऐसा करते हैं तो आप साइबर ठगी के शिकार बन सकते हैं।