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कोल घोटाले में प्रधानमंत्री को बड़ी रहत

नई दिल्ली। कोयला घोटाले में विपक्ष के सवालों और हमलों से घिरे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने प्रधानमंत्री का नाम एफआइआर में शामिल करने का निर्देश मांगने वाली अर्जी खारिज कर दी है। सीबीआइ ने एक बार फिर एजेंसी को नियंत्रणमुक्त करने की सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। सीबीआइ निदेशक रंजीत सिन्हा की ओर से दलील दी गई कि चाहे संयुक्त मोर्चा की सरकार हो, राजग की हो या संप्रग की सभी एजेंसी पर नियंत्रण चाहते हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी।
मंगलवार को याची एमएल शर्मा ने कोयला ब्लॉक आवंटन में प्रधानमंत्री की भूमिका पर सवाल उठाया था। उन्होंने कुमार मंगलम बिड़ला व पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेख के खिलाफ एफआइआर दर्ज होने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति का हवाला दिया। शर्मा ने उसे आधार बनाकर सीबीआइ को पीएम के खिलाफ कार्यवाही का निर्देश मांगा, लेकिन न्यायमूर्ति आरएम लोधा की पीठ ने मांग ठुकराते हुए कहा कि सीबीआइ जांच चल रही है। वही इसे भी देखेगी। शर्मा ने पूर्व मंत्रियों और नेताओं के सिफारिशी पत्रों का जिक्र करते हुए कहा, ‘सरकार से पूछा जाए कि क्या इनके आधार पर ही आवंटन हुए थे।’ इस पर कोर्ट ने कहा कि अभी जांच चल रही है और वह निष्कर्ष पर पहुंच रहे हैं।
वहीं, सीबीआइ निदेशक की ओर से फिर सरकार में सचिव स्तर का दर्जा दिलाने की मांग की गई, ताकि वह सीधे मंत्री को रिपोर्ट कर सके। वकील अमरेंद्र शरण ने कहा कि इससे कामकाज में तेजी आएगी। अभी उनके अच्छे प्रस्ताव भी बाबूगीरी का शिकार हो जाते हैं और सरकार ने निदेशक को सचिव स्तर का दर्जा देने से साफ इन्कार कर दिया। शरण ने कहा कि वह जानते थे ऐसा ही होगा। कोई भी सरकार सीबीआइ पर नियंत्रण नहीं खोना चाहती। सरकार ने निदेशक को मुकदमों की पैरवी के लिए वकील नियुक्त करने का अधिकार देने से भी मना कर दिया। कोर्ट ने इस पर सरकार से लिखित जवाब दाखिल करने को कहा है।

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