New Delhi: हर कोई पत्रकार बन गया तो बिगड़ जाएगी व्यवस्था:सुप्रीम कोर्ट 

 

हर किसी को पत्रकार मानने से होगी दिक्कत :CJI

नई दिल्ली आज स्वतंत्र पत्रकारों के डोर में कौन असली पत्रकार है, कोण नहीं ? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को बहस के बाद चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि, अगर देश के हर नागरिक को पत्रकार मान लिया गया तो व्यवस्था में बहुत दिक्कतें पैदा हो जाएगी।

दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, नेटवर्क ऑफ वूमेन इन मीडिया और वरिष्ठ पत्रकार परांजोय गुहा ठाकुरता ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई गई PIL में कहा गया है कि विरोध-प्रदर्शनों को कवर करने वाले स्वतंत्र और फ्रीलांस पत्रकारों को दिल्ली पुलिस काम नहीं करने देती। पुलिस उनसे प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की मान्यता मांगती है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि PIB मान्यता कुछ ही लोगों के पास है। कई स्वतंत्र पत्रकार किसी बड़े संस्थान से नहीं जुड़े हैं। ऐसे में पुलिस के लिए एक राष्ट्रीय प्रोटोकॉल तय होना चाहिए कि, मीडिया संस्थान का ID कार्ड रखने वाले को न रोका जाए।

कोर्ट ने कहा कि,आज पत्रकारिता एक जैसी नहीं रही। आज PIB से मान्यता प्राप्त पत्रकार,पंजीकृत अखबार/चैनल में काम करने वाले पत्रकार,स्वतंत्र और फ्रीलांस पत्रकार साथ-साथ यूट्यूब,सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर इंस्टाग्राम/फेसबुक पर रील बनाकर खुद भी को पत्रकार बताने लगे है।

 सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विरोध स्थलों पर अब पेशेवर पत्रकारों से ज्यादा रील बनाने वालों की भीड़ आती है, जिससे कानून-व्यवस्था संभालना मुश्किल होता है।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, “हमें सावधानी बरतनी होगी। अगर हर कोई पत्रकार बनने लगेगा तो इससे दूसरे लोगों के लिए समस्याएं पैदा होंगी।”

कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हर नागरिक को है, लेकिन क्या यह स्वतंत्रता हर किसी को पत्रकार के रूप में अतिरिक्त सुरक्षा का अधिकार भी देती है, इस पर विस्तार से विचार करना होगा। मामले को अगली सुनवाई के लिए रख दिया गया है।

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