श्रीनगर, एजेंसी
राजग के घटक दल से जुड़े संजय सर्राफ ने रविवार को इस बात की पुष्टि की कि वह सैयद अली शाह गिलानी से मिले थे, लेकिन उन्होंने इस खबर का खंडन किया कि वह उनके पास नरेंद्र मोदी का कोई संदेश लेकर गए थे।
लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) की युवा शाखा के प्रमुख सर्राफ ने कहा कि इन अलगाववादी नेता के साथ उनका संबंध व्यक्तिगत है। उन्होंने कहा कि मैं पिछले कई सालों से गिलानी से मिलता रहा हूं, लेकिन जो खबर आयी है, उस संदर्भ में मैं उनसे नहीं मिला था।
उन्होंने कहा कि जब उन्हें पता चला कि गिलानी ने दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता नरेंद्र मोदी के साथ वार्ता शुरू करने के वास्ते दो दूत उनसे मिले थे और उन दूतों में उनका भी नाम है तब वह बिहार से यहां आए।
सर्राफ ने कहा कि यह बिल्कुल ही बेबुनियाद खबर है। इस साल मार्च के प्रारंभ में गिलानी को इलाज के लिए दिल्ली ले जाया गया, तब से मैं उनसे नहीं मिला। जब उनसे मीडिया की इस खबर के बारे में पूछा गया कि दो दूतों में एक के रूप में उनका नाम आया है तो उन्होंने कहा कि वह उस दैनिक के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर गौर रहे हैं, जिसने झूठ फैलाने के लिए यह खबर छापी और उनका नाम ऐसे प्रकरण में घसीटा, जिसका हिस्सा वह थे ही नहीं।
गिलानी ने शुक्रवार को दावा किया था कि मोदी ने कश्मीर मुद्दे का हल करने का वादा कर भाजपा के लिए अच्छा माहौल तैयार करने के उद्देश्य से उनके और जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेतृत्व के पास दो दूत भेजे थे। गिलानी ने अबतक इन दूतों का नाम नहीं बताया है। यह भेंट कथित रूप दिल्ली में 22 मार्च को हुई। अलगाववादी नेता ने यह भी दावा किया कि दूतों ने अन्य अलगाववादी नेताओं से भी भेंट की जो कश्मीर मुद्दे के हल के लिए राजग के सत्ता में आने की आस लगाए हुए हैं।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कल ही इस कदम के पीछे गोपनीयता पर सवाल उठाया था और कट्टरपंथी अलगाववादी नेता से ऐसे दूतों की पहचान बताने को कहा ताकि यह पता चल पाए कि कौन झूठ बोल रहा है। गिलानी के दावे का जमात-ए-इस्लामी और हुर्रियत कांफ्रेंस के नरमपंथी धड़े ने खंडन किया। नरमपंथी धड़े ने कट्टरपंथी नेता पर लोगों में भ्रम फैलाने के लिए जानबूझकर ऐसा बयान देने का आरोप लगाया।